युवा चीनी अब क्या सपना देखते हैं? उनकी उम्मीदें और लक्ष्य क्या हैं? क्या ‘उभरती हुई पीढ़ी’ के पोते-पोतियां अब भी मेहनत से प्रगति और सबके लिए समृद्धि पर यक़ीन करते हैं? या फिर उनके मूल्य और सोच बदल चुके हैं?
चीन में लोग शायद ही कभी अपने सपनों के बारे में बात करते हैं. हां, सरकार का ‘चाइनीज़ ड्रीम’ ज़रूर है, जो उन लोगों से समृद्धि का वादा करता है, जो कड़ी मेहनत करते हैं और अपने देश को दुनिया के शिखर पर ले जाने की बात करते हैं. लेकिन अब तेज़ आर्थिक उछाल का दौर बीत चुका है और चीन की अर्थव्यवस्था ठहराव से जूझ रही है. बहुत सारे युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है. कई अब अपने पेरेंट्स की तरह कड़ी मेहनत भी नहीं करना चाहते हैं.
दो एपिसोड्स- ‘पेंटबॉक्सर, इन्फ़्लूएंसर्स और अरबपतियों के साथ एक दिन’ और ‘रॉक स्टार्स, रेबेल्स और राजकुमारियों के साथ एक रात’ में फ़िल्ममेकर्स उन युवाओं से मिले, जो अपने पेरेंट्स की उम्मीदों और सपनों से अलग रास्ता बना रहे हैं. ये लोग फ़िल्ममेकर्स को अपने घरों में बुलाते हैं और उनसे अपने दिल की बातें खुलकर बताते हैं. बदले में फ़िल्ममेकर्स इन युवाओं के बारे में बात नहीं करते, बल्कि वो उन्हें अपनी कहानियां ख़ुद सुनाने देते हैं.
एक युवा महिला कहती हैं कि ‘हमारी पीढ़ी के सपने पूरी तरह अलग हैं.’ एक दूसरा युवा यक़ीन के साथ कहता है कि ’मेरा सपना मेरे बच्चों पर नहीं, बल्कि ख़ुद मुझ पर केंद्रित होना चाहिए.’ वहीं एक अन्य युवा महिला कहती हैं कि ’मुझे लगता है कि मैं कुछ भी आज़मा सकती हूं और जो ठान लूं, उसे हासिल कर सकती हूं’. एक युवक स्वीकार करता है कि ’मेरी बहुत बड़ी महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं. मैं बस इतना पैसा कमाना चाहता हूं कि आराम से जी सकूं और वो कर सकूं, जो मुझे पसंद है.’ और एक अन्य युवा ज़ोर देकर कहता है कि ’मैं मेहनत का बोझ ढोने वाला इंसान नहीं, बल्कि एक दिलचस्प व्यक्तित्व बनना चाहता हूं.’
#dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #china
----------------------------------------------------------------------------------------
अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए.
विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: @dwhindi
और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G
चीन में लोग शायद ही कभी अपने सपनों के बारे में बात करते हैं. हां, सरकार का ‘चाइनीज़ ड्रीम’ ज़रूर है, जो उन लोगों से समृद्धि का वादा करता है, जो कड़ी मेहनत करते हैं और अपने देश को दुनिया के शिखर पर ले जाने की बात करते हैं. लेकिन अब तेज़ आर्थिक उछाल का दौर बीत चुका है और चीन की अर्थव्यवस्था ठहराव से जूझ रही है. बहुत सारे युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है. कई अब अपने पेरेंट्स की तरह कड़ी मेहनत भी नहीं करना चाहते हैं.
दो एपिसोड्स- ‘पेंटबॉक्सर, इन्फ़्लूएंसर्स और अरबपतियों के साथ एक दिन’ और ‘रॉक स्टार्स, रेबेल्स और राजकुमारियों के साथ एक रात’ में फ़िल्ममेकर्स उन युवाओं से मिले, जो अपने पेरेंट्स की उम्मीदों और सपनों से अलग रास्ता बना रहे हैं. ये लोग फ़िल्ममेकर्स को अपने घरों में बुलाते हैं और उनसे अपने दिल की बातें खुलकर बताते हैं. बदले में फ़िल्ममेकर्स इन युवाओं के बारे में बात नहीं करते, बल्कि वो उन्हें अपनी कहानियां ख़ुद सुनाने देते हैं.
एक युवा महिला कहती हैं कि ‘हमारी पीढ़ी के सपने पूरी तरह अलग हैं.’ एक दूसरा युवा यक़ीन के साथ कहता है कि ’मेरा सपना मेरे बच्चों पर नहीं, बल्कि ख़ुद मुझ पर केंद्रित होना चाहिए.’ वहीं एक अन्य युवा महिला कहती हैं कि ’मुझे लगता है कि मैं कुछ भी आज़मा सकती हूं और जो ठान लूं, उसे हासिल कर सकती हूं’. एक युवक स्वीकार करता है कि ’मेरी बहुत बड़ी महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं. मैं बस इतना पैसा कमाना चाहता हूं कि आराम से जी सकूं और वो कर सकूं, जो मुझे पसंद है.’ और एक अन्य युवा ज़ोर देकर कहता है कि ’मैं मेहनत का बोझ ढोने वाला इंसान नहीं, बल्कि एक दिलचस्प व्यक्तित्व बनना चाहता हूं.’
#dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #china
----------------------------------------------------------------------------------------
अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए.
विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: @dwhindi
और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G
- Category
- Documentaries
- Tags
- DW, Deutsche Welle, DW Documentary हिन्दी

Comments