यूं तो तय था कि ये मंज़र आप कभी नहीं देख पाएंगे. जब ईरान में युद्ध शुरू हुआ, तो वहां के दो लोगों ने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी छिपते-छिपाते रिकॉर्ड करनी शुरू की. ईरान से स्मगल करके लाई गईं ये फ़ुटेज दिखाती हैं कि ईरान के लोग अंदरूनी दबाव और बाहरी हमले के बीच किस तरह पिस रहे हैं.
30 मिनट की ये फ़िल्म अमेरिका-इस्राएल की बमबारी के बीच ईरान का वो चेहरा दिखाती है, जो इससे पहले कभी नहीं देखा गया है. जनवरी 2026 में ईरानी हुकूमत देशभर में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचल रही थी. अमेरिका और इस्राएल ने हफ़्तों तक धमकाने के बाद 28 फ़रवरी को ईरान के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी.
वीडियो बनाने वाले दोनों लोग ईरान के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं. एक राजधानी तेहरान में और दूसरे पाकिस्तान की सीमा से सटे बलूचिस्तान प्रांत में. वो जंग के शुरुआती हफ़्तों से वीडियो बना रहे थे. उन्होंने फ़ोन से अपने चेहरे दिखाए बिना वहां के हालात दर्ज किए. वो जब भी रिकॉर्डिंग करते थे, उनके सिर पर जान का ख़तरा मंडराता रहता था.
ईरान में हुकूमत का मीडिया पर बहुत कड़ा नियंत्रण है. जनवरी के प्रदर्शनों को देखते हुए और फिर जब जंग शुरू हो गई, तो हुकूमत ने इंटरनेट पर लगभग पूरी तरह बंद कर दिया. इससे देश के अंदर और बाहर का हाल लेना बहुत मुश्किल हो गया. मीडिया पर ऐसे दबाव की हालत में हम आपके सामने ये फ़िल्म पेश कर रहे हैं.
#dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #iran #trump #straitofhormuz
----------------------------------------------------------------------------------------
अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए.
विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: @dwhindi
और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G
30 मिनट की ये फ़िल्म अमेरिका-इस्राएल की बमबारी के बीच ईरान का वो चेहरा दिखाती है, जो इससे पहले कभी नहीं देखा गया है. जनवरी 2026 में ईरानी हुकूमत देशभर में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचल रही थी. अमेरिका और इस्राएल ने हफ़्तों तक धमकाने के बाद 28 फ़रवरी को ईरान के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी.
वीडियो बनाने वाले दोनों लोग ईरान के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं. एक राजधानी तेहरान में और दूसरे पाकिस्तान की सीमा से सटे बलूचिस्तान प्रांत में. वो जंग के शुरुआती हफ़्तों से वीडियो बना रहे थे. उन्होंने फ़ोन से अपने चेहरे दिखाए बिना वहां के हालात दर्ज किए. वो जब भी रिकॉर्डिंग करते थे, उनके सिर पर जान का ख़तरा मंडराता रहता था.
ईरान में हुकूमत का मीडिया पर बहुत कड़ा नियंत्रण है. जनवरी के प्रदर्शनों को देखते हुए और फिर जब जंग शुरू हो गई, तो हुकूमत ने इंटरनेट पर लगभग पूरी तरह बंद कर दिया. इससे देश के अंदर और बाहर का हाल लेना बहुत मुश्किल हो गया. मीडिया पर ऐसे दबाव की हालत में हम आपके सामने ये फ़िल्म पेश कर रहे हैं.
#dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #iran #trump #straitofhormuz
----------------------------------------------------------------------------------------
अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए.
विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: @dwhindi
और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G
- Category
- Documentaries
- Tags
- DW, Deutsche Welle, DW Documentary हिन्दी

Comments